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मौर्यत्तरकालीन और गुप्तकालीन हरियाणा – Haryana History

मौर्यत्तरकालीन और गुप्तकालीन हरियाणा – Haryana History

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मौर्यत्तरकालीन और गुप्तकालीन हरियाणा

मौर्यत्तर-काल से संबधित हरियाणा:

मौर्य काल के अंतिम शासक- बृहद्रथ की हत्या उसके अपने ही सेनापति पुष्यमित्र शुंग ने की और दक्षिण भारत में एक नए राजवंश का उदय हुआ, जिसे शुंग राजवंश कहते हैं।

  • शुंग-वंश के साक्ष्य शुंगकालीन मूर्तियां – सुध (यमुनानगर-जगाधरी) से मिली हैं।
  • इण्डोग्रीक शासकों के सिक्के – खोखराकोट (रोहतक) एवं नौरंगाबाद (भिवानी) से मिले।
  • हरियाणा नहीं अपितु पुरे भारत के सबसे प्राचीन सिक्कों को “पंचमार्क” कहा गया जो कि हरियाणा में पाँचवी शताब्दी में – सुध (यमुनानगर-जगाधरी), अग्रोहा (हिसार), नौरंगाबाद (भिवानी) से मिले हैं।
  • कनिष्क प्रथम से संबधित सोने के सिक्के – मिताथल (भिवानी) से मिले हैं।
  • कुषाणकालीन मूर्तियाँ – रोहतक से मिली हैं।
  • कुषाण शैली का द्वार-स्तंभ – रोहतक में है।

हरियाणा से प्राप्त – गुप्तकालीन अभिलेख:

गुप्त काल को भारत का स्वर्ण युग माना जाता है। मौर्य वंश के पतन के पश्चात गुप्त साम्राज्य की नींव तीसरी शताब्दी के चौथे दशक में रखी गयी। इस साम्राज्य के पहले शासक चंद्रगुप्त-प्रथम थे।

  • गुप्तकालीन प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख से पता चलता है कि समुन्द्रगुप्त ने यौधेय गणराज्य का बचा हुआ भाग गुप्त साम्राज्य में मिला लिया था।
  • 4-5वीं शताब्दी के हिसार स्तंभ अभिलेख – का एक स्तंभ हिसार के गुजरी महल से मिला है, जिस पर आठ अभिलेख हैं।
  • भिवानी में तोशाम अभिलेख है, जहाँ विष्णु के एक मंदिर एवं दो सरोवरों के निर्माण का वर्णन किया गया है।
  • जींद में नाचारखेड़ा अभिलेख स्थित है जिसमें राम, सीता, लक्ष्मण को जटायु से बात करते दर्शाया गया है।
  • यमुनानगर से प्राप्त कपाल मोचन अभिलेख, में 2 अभिलेख हैं और दोनों अपूर्ण हैं।
  • लाओस अभिलेख, लाओस (हिन्द -चीन) से प्राप्त पाँचवी शताब्दी का अभिलेख है। इसमें लाओस के राजा – महाराजाधिराज श्री देवका द्वारा कुरुक्षेत्र महातीर्थ की स्थापना का वर्णन मिलता है।
  • पिंजौर अभिलेख से पता चलता है कि पिंजौर का उस समय का नाम “पंचमपुर” था।
  • झज्जर के मोहनबाड़ी अभिलेख से एक विष्णु मंदिर के बारे में जानकारी मिलती है।

गुप्तकालीन मुर्तिया एवं सिक्के – 

  • समुन्द्रगुप्त के सिक्के – जगाधरी एवं मिताथल से प्राप्त हुए हैं।
  • गुप्तकालीन सूर्य देव की मूर्ति – अग्रोहा (हिसार) से मिली है।
  • रामायण श्लोकांकित मुहरें – नचारखेड़ा (जींद) से मिली हैं।
  • विष्णु की मूर्ति – मोहनबाड़ी (झज्जर) से मिली है।

 

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